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स्वास्थ्य यात्रा पर ऑनलाइन गोष्ठी संम्पन्न
July 19, 2020 • विकास दीप त्यागी • उत्तर प्रदेश
  • स्वास्थ्य यात्रा जीवन की निरंतर प्रक्रिया है-डॉ अमित पाहुजा (एम बी बी एस)
  • स्वास्थ्य ही जीवन का आधार है-राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य

यूरेशिया संवाददाता

गाजियाबाद,,केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान"स्वास्थ्य एक यात्रा" विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया।यह कोरोना काल मे परिषद का 60वां वेबिनार था।

मुख्य वक्ता डॉ अमित पाहुजा ने कहा कि स्वास्थ्य निरंतर चलने वाली प्रक्रिया का नाम है।इसके लिए पुरुषार्थ करना पड़ता है।अच्छे स्वास्थ्य के लिए सबसे आवश्यक है नियमित व्यायाम व योग।कुछ समय स्वयं के लिए निकालकर सुबह घूमने अवश्य जाइए।आधी समस्याएं दूर होंगी।प्रत्येक उम्र की अपनी समस्याएं होती हैं। 40 वर्ष पश्चात् नियमित जांच प्रतिवर्ष अवश्य करवाएं ताकि बीमारी को प्रारंभिक अवस्था में ही जाना जा सके।कोई बीमारी पता लगने पर तनाव लेने की बजाय नियमित दवाई लें, डॉक्टर के निर्देशों का पालन करें व परहेज करें।मन को मजबूत बनाएं व बीमारी को हावी न होने दें।तनाव लेना छोड़ें।छोटी-छोटी बातों के तनाव फिर वो नौकरी की समस्या हो या आर्थिक,शारीरिक सबका हल है।तनाव लेने से समस्या दूर नहीं होगी,उसका समाधान ढूंढ़ कर उससे निजात पाने में अपनी ऊर्जा लगाएं।उन्होंने कहा कि रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना ही पर्याप्त नही है।स्वस्थ रहने के लिए पानी का सेवन भी आवश्यक है कितना पानी,और कब-कब पीना चाहिए ये जानना भी आवश्यक है।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि स्वस्थ रहना सर्वोत्तम सुख है।कहावत भी है- 'पहला सुख निरोगी काया'। कोई आदमी तभी अपने जीवन का पूरा आनन्द उठा सकता है,जब वह शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहे।स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी शारीरिक स्वास्थ्य अनिवार्य है।ऋषियों ने कहा है 'शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्‌' अर्थात्‌ यह शरीर ही धर्म का श्रेष्ठ साधन है।यदि हम धर्म में विश्वास रखते हैं और स्वयं को धार्मिक कहते हैं,तो अपने शरीर को स्वस्थ रखना हमारा पहला कर्तव्य है। यदि शरीर स्वस्थ नहीं है,तो जीवन भारस्वरूप हो जाता है इसलिए शरीर को स्वस्थ रखने का विशेष ध्यान रखें।

प्रान्तीय महामंत्री प्रवीण आर्य ने कहा कि शरीर स्वयं में डॉक्टर होता है अपने अन्दर होने वाले विकारों का उपचार करने की शक्ति शरीर मे होती है।नियमित रूप से व्यायाम व खान पान में बदलाव करके शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है।

योगाचार्य सौरभ गुप्ता ने गोष्ठी का कुशल संचालन करते हुए कहा कि स्वास्थ्य वृत व मिताहार का ठीक प्रकार से पालन करने पर व्यक्ति दीर्घायु व रोगों से मुक्त हो सकता है।

आर्य नेता श्री सुदेश डोगरा जी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सभी को अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की प्रेरणा प्रदान की।

गायिका श्रीमती राजश्री यादव, किरण सहगल,वीना वोहरा,पुष्पा चुघ,लाजवन्ती गिरधर,संध्या पांडेय,पुष्पा शास्त्री,नरेश खन्ना आदि ने मधुर गीत सुनाये ।

प्रमुख रूप से धर्मपाल आर्य, आनन्द प्रकाश आर्य (हापुड़), उर्मिला आर्या,गीता गर्ग,डॉ रचना चावला,सुरेन्द्र शास्त्री,डॉ रमा कान्त गुप्ता,ओम सपरा,राजेश मेहंदीरत्ता आदि उपस्थित रहे।