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  घर की लक्ष्मण रेखा न लांघें पर नजरिया बदल सम्बन्धों में घोलें मिठास
April 7, 2020 • Vikas Deep Tyagi • मेरठ
  •  मुश्किल से मिले इस वक्त को अपनों के साथ बनायें यादगार
  • लॉक डाउन के वक्त को छुट्टी की तरह इस्तेमाल करेंए पत्नी व बच्चों को दें समय
  • सामाजिक दूरी के प्रति सजगता के साथ बनी रहे मन की निकटता

यूरेशिया संवाददाता

मेरठ । कोरोना वायरस को मात देने के लिए घर से बाहर निकलना पूरी तरह से मना हैए ऐसे में लोग घर में मन लगाने की तरह.तरह की तरकीब आजमा रहे हैं । इस महत्वपूर्ण समय को घर.परिवार के साथ बिताने के साथ ही सगे.सम्बन्धियों और इष्ट मित्रों से फोन या संदेशों के आदान.प्रदान के जरिये संपर्क में रहना भी एक अच्छा तरीका साबित हो सकता है । इससे जहाँ एक.दूसरे का हालचाल जान सकेंगे वहीँ संबंधों में एक मिठास का भाव भी देखने को मिलेगा ।
मनोचिकित्सक डॉ विभा नागर का कहना है कि लॉक डाउन में लोगों की आमदनी व आजादी कम हो गयी है और उनके पास फालतू वक्त और असुरक्षा की भावना बढ गयी है लिहाजा तनाव बढना लाजमी है । हम इस तनाव को नजरिया बदलकर दूर कर सकते हैं । लॉक डाउन कोरोना का फैलाव रोकने के लिए जरूरी है । दूसरा आप घर में रहकर देश समाज के लिए योगदान दे रहे हैं । तीसरा, यह अनंत काल की समस्या नहीं है । यह जल्द ही खत्म हो जाएगा । लॉक डाउन के वक्त को छुट्टी की तरह इस्तेमाल करें । पति-पत्नी एक दूसरे को वक्त दें । बच्चों के साथ खेलें । समय बचे तो भविष्य की प्लानिंग करें ।
इसके साथ ही दौडती-भागती जिन्दगी में एकाएक आये ठहराव का असर किसी के भी आचार-व्यवहार में साथ देखा जा सकता है । ऐसे ही समय में लोगों के धैर्य की असली परीक्षा होती है । इस समय अपनी बदली दिनचर्या में कुछ समय अपने शुभचिंतकों से फोन के जरिये जुडकर भी पुरानी यादों को ताजा करने के साथ ही सम्बन्धों को फिर से एक ताजगी दे सकते हैं । इसके लिए भी सावधानी बरतने की जरूरत है कि एक दूसरे से फोन पर भी बात करते समय सिर्फ और सिर्फ कोरोना वायरस के खतरों के बारे में वार्तालाप न करें । अखबार.टीवी और आस-पडोस में लोग सिर्फ कोरोना के बारे में सुन-सुन कर ऊब चुके हैं, इसलिए उन्हें कुछ समय के लिए इससे हटकर बात करने की जरूरत महसूस होती है ।
एक बुजुर्ग दम्पति ने बातचीत में बताया कि वह लोग इस लॉक डाउन के वक्त प्रतिदिन कुछ समय के लिए वीडियो काल कर बाहर रह रहे अपने नाती-पोतों के संपर्क में रहते हैं । इससे जहाँ उनका समय भी अच्छे से व्यतीत हो जाता है । इसके अलावा कुछ वक्त योगा करके तो कुछ समय पुस्तकों का अध्ययन करके बिताते हैं ,जो कि एक अलग तरह का अनुभव भरा है ।
न किसी के घर जाएँ और न किसी को घर बुलाएँ
 कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव का मूल मन्त्र जरूरी सावधानी बरतने के साथ ही सोशल डिस्टेनशिंग ;सामाजिक दूरी, को बरकरार रखने में ही है । इसके लिए जरूरी है कि जब तक वायरस का खतरा बरकरार है तब तक न तो किसी के घर जाएँ और न ही किसी को अपने घर पर बुलाएं । अगर आस-पडोस में किसी से बात करना बहुत ही जरूरी हो तो एक मीटर की दूरी बनाए रखें । साबुन-पानी से अच्छी तरह से हाथ धोएं ।