ALL मेरठ सहारनपुर मण्डल मुजफ्फरनगर बागपत/ बड़ौत उत्तर प्रदेश मुरादाबाद मंडल राष्ट्रीय राजनीतिक विविध करियर
23 सितंबर को केतू-गुरू का साथ छूटने के बाद मिलेगी कोरोना से राहत 
September 18, 2020 • URESHIYA News • विविध
  •  जन्मकुंडली में शुभ होने पर उच्चपद तक पंहुचाते है राहु और केतू

अरविन्द सिसौदिया/युरेशिया संवाददाता

नानौता (सहारनपुर), आगामी 23 सितंबर को 18 महीने बाद राहु और केतू राशि परिवर्तन कर रहे है। राहु मिथुन राशि को छोडकर वृष राशि में तो केतू धनु से वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। इसी के चलते गुरू व केतू का साथ छूट जाने से कोरोना वायरस से राहत मिलने की संभावना बन रही है। तो वहीं गुरू व शनि वक्री से मार्गी हो जाएंगे। ग्रहों का यह परिवर्तन राशियांे को प्रभावित करेगा। हांलाकि गुरू व शनि की युति से कोरोना को समाप्त होने में समय लगेगा।
प्रमुख ज्योतिषाचार्य मुकेश मित्तल के अनुसार गत 4 नंवबर 2019 की स्थिती में केतू धनु राशि में स्थित थे। तो वहीं इसी दिन ही गुरू ने वृश्चिक राशि छोडकर धनु राशि में ही प्रवेश किया था। जिसके चलते गुरू व केतू की युति हो गई थी। इसी के चलते नवंबर 2019 में ही चीन में कोरोना का पहला मरीज पाया गया था। ज्योतिष के अनुसार गुरू व केतू की युति से महामारी फैलती है इसीलिए पूरे विश्व को इस महामारी ने अपनी चपेट में ले लिया था। अब आगामी 23 सितंबर को केतू धनु राशि से वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। जिसके चलते गुरू व केतू की युति टूट जाएगी। युति के टूटने के बाद से ही दुनिया को कोरोना संक्रमण से राहत मिलने की संभावना बनी हुई है।

गुरू व शनि के मार्गी होने से भी मिलेगी राहत -

ज्योतिषाचार्य मुकेश मित्तल के अनुसार गुरू व शनि का साथ में वक्री होना लोगों के लिए पीडाकारी होता है। इसी का परिणाम है कि 14 मई 2020 को गुरू व 11 मई 2020 को शनि वक्री हुए थे। मई में कोरोना संक्रमण में जमकर फैला। अब 13 सितंबर की सुबह करीब 6 बजे गुरू और 29 सितंबर को शनि मार्गी हो जाएंगे। जिसके चलते लोगों को कोरोना पीडा से बहुत राहत मिल सकेगी। 
राहु व केतू से राहत के उपाय -

राहु से पीडित गोमेद रत्न धारण करें, सरस्वती जी की आराधना के साथ सफाई कर्मचारियों की सहायता करें। सिर पर चोटी रखते हुए शिवजी को जल चढाएं। काले कपडे व उडद का दान करें। जबकि केतू से पीडित लहसुनिया रत्न धारण करें, गणेश पूजन के साथ रक्तचंदन की माला धारण करें, घर की छत पर ध्वज लगाने के साथ कंबल, तिल व छाता दान करें।