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बच्चों की देखरेख के टिप्स दिये आशा और आगंनबाड़ी कार्यकर्ताओं को
February 25, 2020 • Vikas Deep Tyagi • मेरठ
  • बोतल से दूध पिलाने के नुकसान भी बताये
  • मां के दूध को बताया सर्वश्रेष्ठ

 यूरेशिया संवाददाता

मुजफ्फरनगर, 25 फरवरी 2020। जनपद में मातृ मत्यु दर को कम करने और बच्चों की देखभाल को लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तत्वावधान में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (सीएचसी) मोरना में समीक्षा बैठक हुई। बैठक में अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजीव निगम और सीएचसी प्रभारी डॉक्टर अर्जुन सिंह ने आशा और आगंनबाड़ी कार्यकर्ताओं को जागरूक करते हुए मातृ मृत्यु, एनीमिया एवं शिशु के जीवन के पहले छह महीनों की देखरेख के बारे में बताया।  बच्चों को बोतल के दूध के नुकसान के बारे में भी अवगत कराया। 

डॉ. निगम ने बताया यदि महिला की प्रसव के 42 दिन के अंदर मृत्यु हो जाती है तो वह मातृ मृत्यु मानी जाती है। मातृ मृत्यु मुख्य रूप से हाईब्लड प्रेशर, संक्रमण, असुरक्षित प्रसव, खून की कमी आदि के कारण होती है । उन्होंने कहा यदि प्रसव के समय महिला का ध्यान न रखा जाए तो जच्चा-बच्चा दोनों के लिए खतरा हो सकता है। दोनों को सुरक्षित रखने के लिए प्रसव के बाद 48 घंटे तक अस्पताल में रुकें । गर्भधारण के समय सफाई पर विशेष ध्यान दें। चिकित्सक की सलाह से ही आयरन की गोलियां खाएं। इन सब बातों का ध्यान रख कर जच्चा - बच्चा को सुरक्षित ऱखा जा सकता है और मातृ मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है। 

डा. निगम ने बताया जन्म के बाद शिशु को छह महीने तक विशेष रूप से स्तनपान कराने की सलाह दी जाती है, क्योंकि मां का दूध नवजात के लिए सर्वश्रेष्ठ है। मां का दूध शत-प्रतिशत सुरक्षित है। स्तनपान से बच्चों में  मधुमेह, रक्त कैंसर और उच्च रक्तचाप का खतरा कम हो जाता है। मां का दूध बच्चों के लिए बेहद पौष्टिक होता है। इसमें शामिल सभी पोषक तत्व बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए जरूरी हैं। साथ ही इसके सेवन से बच्चों में रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। खास बात यह है कि शिशु को मां के दूध से कोई एलर्जी नहीं होती है।