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डाक्टर डे (1 Jully) विशेष:- परिवार छोड़ कोरोना काल में लोगों की जिदंगी बचा रहे धरती के भगवान
July 1, 2020 • विकास दीप त्यागी • मेरठ

यूरेशिया संवाददाता

मेरठ। डॉक्टर जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे मरीजों का न सिर्फ इलाज करते हैं, बल्कि उन्हें एक नया जीवन भी देते हैं। इसलिए उन्हें धरती पर भगवान का दर्जा दिया जाता है, उन्हें जीवनदाता कहा जाता है। इसकी मिसाल कोरोना काल में सरकारी चिकित्सकों ने पेश की है । यह जानते हुए कि उनकी जिंदगी भी दांव पर लग सकती है, फिर भी वह दिन रात कोरोना मरीजों की सेवा में जुटे हुए हैं। डाक्टर्स डे पर हमने शहर के चिकित्सकों से बातचीत की।

कोरोना संक्रमितों का प्रोत्साहन जरूरी:  डा .राजकुमार

जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी सीएमओ डा. राजकुमार अपनी सफलता और कोरोना काल में लोगों की सेवा का पूरा श्रेय अपनी पत्नी मीनाक्षी को देते हैं। वह उन्हें ग्रेट लेडी का दर्जा देते हैं। उन्होंने कहा विषम परिस्थिति में उनकी पत्नी उनका पूरा साथ दे रही हैं। उन्होने बताया कोरोना काल में वह अपने वृद्ध पिता भोजराज, मॉ विमला की सेवा भी नहीं कर पा रहे है। जो इस समय अत्याधिक आवश्यक है। फोन पर ही उनका हालचाल पूछ लेते हैं। सीएमओ का पूरा परिवार ही देश सेवा में जुटा है। एक बेटा आर्यन भटिंडा में सेना में मेजर है। दूसरा बेटा सार्थक दिल्ली के एक अस्पताल में मरीजों की सेवा लगा है। डा. राजकुमार 2017 से मेरठ में सीएमओ के पद पर तैनात हैं। वह मूल रूप से जिला गौतमबुद्घ नगर के नीमका  के रहने वाले हैं। उन्होंने कहा संक्रमित मरीजों का भय को दूर करने के लिये उनको प्रोत्साहित किया जाना जरूरी है। वह स्वंय कोरोना से संक्रमित मरीजों से बात कर उन्हें प्रोत्साहित कर रहे हैं।

  •  चार माह से बच्चों से नहीं मिला:- डा  अशोक

मंडलीय मेरठ-सहारनपुर सर्विलांस अधिकारी डा अशोक तालियान ने पिछले चार माह से  परिवार को त्याग रखा है। वह सिर्फ फोन पर ही अपने परिवार से बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कोरोना चिकित्सकों के लिये नयी चुनौती है। इसकी अभी तक कोई दवा नहीं बनी है। फिर भी चिकित्सकों ने अपने प्रयास से लाखों लोगों को मौत से बचाया है। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि इस बीमारी पर जल्दी काबू पा लिया जाएगा। इसके लिये चिकित्सक प्रयास में जुटे हैं। जब तक कोई वैक्सीन तैयार नहीं होती तब तक सावधानी बरत कर ही इसे बचा जा सकता है।

  • ढाई माह से माता-पिता का चेहरा तक नहीं देखा :- डा. विशवास

 कोरोना काल में सबसे महत्वपूर्ण पद संभांलने वाले जिला सर्विलांस अधिकारी डा. विश्वास चौधरी अपनी कार्यशैली के लिये प्रसिद्ध हैं। कोरोना काल में सीएमओ ने उनको अहम जिम्मेदारी दी है। इसे वह पूरी ईमानदारी के साथ निभा रहे हैं। पहले 86 वर्षीय पिता जितेन्द्र सिंह, माता राजवती उनके पास रहती थी, लेकिन कोरोना काल में वह किसी संक्रमण का शिकार न हो जाये, इस लिए उन्हें अपने भार्ई अविनाश के पास छोड़ा हुआ है। डाण् विश्वास का कहना है कि पिछले ढाई माह से माता पिता से सिर्फ फोन पर ही बात हो पा रही है। उनकी प्राथमिकता कोरोना से संक्रमित मरीजों की सेवा करना है। उन्होंने कहा इस प्रकार का समय जीवन में कभी-कभी आता है। ऐसे मौकों से भागने के बजाय उसका सामना करना चाहिए। उन्होंने जो शपथ नौकरी के समय मरीजों की सेवा के लिये ली थी, उसका वह पूरी तरह पालन कर रहे हैं।

मरीजों की सेवा के लिये जीवन समर्पित :- डा. प्रवीन

यशोदा कुंज निवासी डा. प्रवीन गौतम जिला प्रतिरक्षण अधिकारी हैं वह पांचली खुर्द के नोडल अधिकारी भी हैं। उनका कहना है नौकरी ज्वांइन करते समय उन्हें शपथ दिखाई गयी थी। उसी शपथ को ध्यान में रखते हुए वह दिन रात मरीजों की सेवा में लगे हैं। उन्होंने बताया कोराना काल में कई बार ऐसे मौके आये जब परिवार को उनकी सबसे अधिक जरूरत थी, लेकिन वह सब त्याग कर मरीजों की सेवा में लगे रहे। उन्होंने कहा जिदंगी में ऐसे पल कम मिलते हैं। उन्होंने बताया वह पिछले तीन माह से घर से दूर हैं।

डा. बिधान चंद्र राय की स्मृति में मनाया जाता है डाक्टर्स डे

  • देश के प्रसिद्ध चिकित्सक डा बिधान चंद्र रॉय को श्रद्धांजलि और सम्मान देने के लिए उनकी जयंती और पुण्यतिथि पर डाक्टर्स डे मनाया जाता है। उनका जन्म एक जुलाई 1882 में बिहार के पटना जिले में हुआ था। 80 वर्ष की आयु में 1962 में अपने जन्मदिन के दिन यानी एक जुलाई को ही उनकी मृत्यु हो गई थी।