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ईद उल फितर की नमाज घर पर ही अदा करें- मौलाना आरिफ उल हक
May 22, 2020 • Vikas Deep Tyagi • बागपत/ बड़ौत

विश्वबंधु शास्त्री 

बड़ौत। शुक्रवार को रमजान का आखिरी जुमा था। हर साल आखिरी जुमे पर बाजारों की रौनक बढ़ जाया करती थी। सड़कों पर छोटे-बड़े सभी सफेद कुर्ते पायजामे में नजर आया करते थे, लेकिन इस बार कोरोना संकट के चलते ऐसा नहीं हुआ। पहली बार जनपद की सभी मस्जिदों में चार-पांच लोगों ने अलविदा की नमाज पढ़ी और कोरोना संकट से जल्द निजात की दुआ मांगी और बाकि लोगों ने अपने अपने घरों में जोहर की नमाज पढ़ी। शनिवार को चांद का दीदार किया जाएगा। संभवतया 24 मई को पूरे देश में ईद का पर्व मनाया जाएगा।


मरकजी मस्जिद फूंसवाली के ईमाम मौलाना आरिफ उल हक ने  चार लोगों को नमाज पढ़ाई  और कहा कि जिस मस्जिद में अलविदा के दिन हजारों की भीड़ हुआ करती थी, आज पूरा कंपाउंड खाली पड़ा हुआ है। हालांकि, मौलाना आरिफ उल हक ने आम लोगों से पहले ही अपील की थी कि कोरोना को देखते हुए लोग अलविदा की नमाज पढ़ने मस्जिदों में न जाएं और न ही एक-दूसरे के घरों पर जाएं। उन्होंने कहा कि इस्लाम में रमजान के अखिरी जुमे यानी अलविदा को सबसे अफजल करार दिया गया है।  यूं तो जुमे की नमाज पूरे साल ही खास होती है लेकिन रमजान के आखिरी जुमे अलविदा की नमाज सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। अलविदा की नमाज के बाद सच्चे दिल से मांगी गई हर जायज दुआ अल्लाह कुबूल करता है और अपने बंदों को हर गुनाह से पाक-साफ कर देता है। मौलाना आरिफ उल हक ने बिरादराने इस्लाम से अपने घरों में ही ईद-उल-फ़ितर की नमाज घरों में ही अदा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सभी जानते हैं कोरोना वायरस के कारण लॉक डाउन 31 मई तक बढ़ा दिया गया है। इसी दौरान ईद उल फितर का त्योहार मनाया जाना है। उन्होंने सभी से गुज़ारिश की कि पांचों वक्त की नमाज मय ईद उल फितर की नमाज भी घर पर ही अदा की जाएं। उन्होंने कहा कि दुआ करें कि अल्लाह हम सबकी हिफाजत फरमाएं।
उन्होंने बताया कि जो लोग ईद की नमाज न पढ़ सके तो बेहतर यह है कि वह चाश्त की नमाज सूरज निकलने के बीस मिनट के बाद से लेकर ज़वाल के पहले तक अदा कर सकता है। दो रकाअत चाश्त की नमाज का तरीका नफिल नमाज के जैसा है। चाश्त नमाज कम से कम दो रकाअत और ज्यादा से ज्यादा 12 रकाअत है। कहा कि ईद की नमाज से पहले और बाद में पढ़ा जाने वाला खुत्बा सुनना जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि ईद की नमाज से पहले उर्दू में पढ़ा जाने वाला खुत्बा ऑनलाइन देखकर पढ़ सकते है। मौलाना ने कहा कि ईद की नमाज से पहले लोग अपना फितरा और जकात गरीबों और जरूरतमंदों को देना अनिवार्य है। फितरा जिसकी मात्रा एक साथ (करीब 3 किलोग्राम गेहूं, जौ, खजूर या किशमिश या उनका मूल्य, प्रत्येक बालिग और समझदार व्यक्ति, जो पूरे वर्ष अपने और अपने परिवार पर खर्च उठाता हो, वह अपने और अपने परिवार का फितरा भुगतान करने के लिए वाजिब (जरूरी) है।