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गरीबो को नहीं मिल रहा उनके हक़ का निवाला -अधिकारी हुए बेपरवाह
March 7, 2020 • Vikas Deep Tyagi • मेरठ

यूरेशिया संवाददाता

मेरठ  भले ही सरकार गरीबो का पेट भरने के लिए सस्ते गल्ले की दुकानों पर दो  रूपये किलो गेंहू और तीन रूपये किलो चावल बिकवाकर गरीबो का पेट भरने की कोशिश कर रही है लेकिन आपूर्ति विभाग के पूर्ति निरीक्षक और प्राइवेट ऑपरेटर उनके इस कार्य में पलीता लगा रहे है। गरीब जनता के राशन कार्ड में से कभी किसी का नाम तो कभी किसी का नाम काटा जा रहा है जबकि  कुछ फर्जी राशन कार्ड और राशन कार्ड में फर्जी युनिटो पर राशन डीलर कोटा ख़तम कर देता है। यूरेशिया समाचार पत्र ने 11 फरवरी 2020 को आपूर्ति विभाग +राशन डीलर +प्राइवेट कर्मचारी मिलकर करवा रहे राशन की कालाबाजारी शीर्षक से समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया था जिसके बाद हिन्दू महिला मुखिया के  राशन कार्ड में से  फर्जी नाम काट दिए गए। लेकिन राशन कार्डो में फर्जी यूनिट जुड़े कैसे और इन सबका जिम्मेदार कौन है। इस बात का जवाब किसी के पास नहीं है। गरीब जनता अपने ही हक़ के  निवाले को पाने के लिए सुबह से ही लाइन में लग जाते तब कही जाकर कुछ लोगो को उनके हक़ का निवाला मिल पाता है। सोचने वाली बात तो ये जब राशन डीलर के यहाँ लगे सभी राशन कार्डो का कोटा आता है और उसमे फर्जी यूनिट तक जुड़े है तो राशन ख़तम कैसे हो जाता है और गरीब जनता को परेशानी का सामना क्यों उठाना पड़ता है। आखिर क्यों पूर्ति निरीक्षक दुकानों का निरिक्षण नहीं करते या ये कहा जाए की राशन डीलर द्वारा की जा रही राशन की कालाबाजारी में पूर्ति निरीक्षक का पूर्ण सहयोग है