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हाथरस घटना के बाद: बेटियां बोली स्वतंत्र भारत में कब सुरक्षित होंगे हम
October 1, 2020 • URESHIYA News • सहारनपुर मण्डल
  • अभिभावकों का बडा सवाल- आखिर कब बेटियां सुरक्षित माहौल में जी पाएंगी

अरविन्द सिसौदिया/युरेशिया

नानौता (सहारनपुर), बहु-बेटियों के साथ पहले निर्भया गैंगरेप, फिर हैदराबाद में गैंगरेप के बाद महिला चिकित्सक को जिंदा जलाना और अब हाथरस में गैंगरेप के बाद बेटी से दरिदंगी की गई। इस प्रकार से बढ रही घिनौनी घटनाओं से अभिभावक व परिजन अपनी बच्चियों को लेकर दहशत में जीने को मजबूर हो गए हैं। हर मां-बाप का सिर्फ एक ही सवाल है कि आखिर कब उनकी बेटियां खुलकर सुरक्षित माहौल में जी पाएंगी। लेकिन इस सवाल का जबाब शायद ही कहीं से मिल पाएं। 
हाथरस की गैंगरेप की घटना के बाद सहारनपुर जिले से लेकर पूरे प्रदेश भी आक्रोश देखने को मिल रहा है। ऐसी घटनाओं को देखकर बेटियां सोचने को मजबूर हो गई है कि बेटी होना सौभाग्य है या फिर इस समाज का दुर्भाग्य। बेटियों की संख्या समाज में बढाने को लेकर जहां सरकार अल्ट्रासांउड सैंटरों पर गर्भ जांच पर रोक से लेकर सुकन्या खाते आदि खोलकर इनकी पैदाइश बढाने पर जोर दे रही है तो वहीं समाज के भक्षक इन्हीं के शोषण पर उतारू हो रहे है। हाथरस में बेटी के साथ हुए गैंगरेप की घटना से सभी का दिल दहला कर रख दिया है। इस प्रकार गैंगरेप व छेडछाड की घटनाओं से बेटियों के साथ उनके परिजनों में भी दहशत बनी हुई है। विशेषकर उन बेटियों को लेकर जो बाहर अकेले रहकर पढाई-लिखाई के साथ नौकरी कर रही है। हाथरस कांड में दंरिदों ने गैंगरेप कांड के बाद क्रूरता की गई तो वहीं निर्भया केस में चलती बस से नग्न अवस्था में बाहर फेंक दिया था। इसके अलावा हैदराबाद कांड में महिला चिकित्सक को गैंगरेप के बाद जिंदा जला डाला था। इन सभी बातों को लेकर महिलाओं से लेकर बेटियों का कहना है कि कानून व्यवस्था को बदलकर और कडा प्रावधान किया जाए और बलात्कारियों को सजा सालों में न पंहुचकर मात्र ही कुछ दिनों में मिल जाएं। इस मामले पर महिलाओं ने अपनी प्रतिक्रियाएं जाहिर की है।
हैवानियत की सारी हदें पार -

 शिक्षिका नीतू सिंह का कहना है कि निर्भया केस में वर्षो तक मामला कोर्ट मे लटका रहा। जबकि आरोपियों ने सारी हैवानियत की सारी हदें पार कर दी थी। अब समय की मांग है कि संविधान को बदलकर नए कानून बनाएं जाएं। सभी गैंगरेप में शामिल लोगों को फांसी पर लटकाया जाएं।
घिनौने अपराध की सजा केवल फांसी -

ग्रीन फील्ड एकेडेमी की प्रधानाचार्या श्रीमति कुमुद पुंडीर ने कहा कि ऐसे घिनौने अपराध समाज में होना दुष्टता का उदाहरण है। इस प्रकार के अपराधों को सुनकर पूरे शरीर में कंपकपी सी छुट जाती है। सरकार को ऐसे दरिंदो को केवल फांसी की सजा ही देनी चाहिए। इसका दूसर कोई विकल्प नहीं है।

कानून लचीला होना बढाता है अपराधियों के हौंसले 

 

भाजपा महिला मोर्चा की जिला महामंत्री श्रीमति रक्षा नामदेव ने कहा हमारा कानून ही इतना लचीला है कि अपराधी हर बार बहुत कम सजा पाकर बच जाता है। यदि पकडा भी जाता है तो वर्षों तक लंबी प्रक्रिया चलती है तब तक बहुत देर हो जाती है। इसीलिए अब समय पुराने संविधान को बदलकर नए कानून बनाने की है। ताकि एक भी दरिंदा कानून से बच न सकें।

इंसाफ के लिए न लगे समय -

गृहणी श्रीमति निधी पुंडीर ने कहा कि एक बेटी की मां होने के नाते वह इन मामलों को बहुत अच्छी तरह से समझती है। क्योंकि जिस परिवार की बेटी के साथ ऐसी घटना होती है उस पर क्या बीतती होगी यह पीडित परिवार से अधिक कोई नहीं समझता है। इसके लिए बेटी को इंसाफ में देरी के बजाएं बहुत त्वरित न्याय मिलना चाहिए।

बेटियां, दरिंदो के सामने तोड रही दम -

पउप्र. महिला राष्ट्रीय सशक्त हिन्दु महासंघ की अध्यक्ष डा. नीलू राणा ने कहा कि  गैंगरेप कर दरिंदे बेटियों को मारपीट के बाद जलाकर या फिर हैवानियत कर मार रहे है। इस प्रकार के लोग समाज में दरिंदे होने के साथ समाज में रहने लायक नहीं होत है। जिस प्रकार जहरीले सांप को देखकर लोग मार देते है उसी प्रकार दरिंदगी करने वालों को कानून में सिर्फ फांसी की सजा ही मिलनी चाहिए।

बेटियों-महिलाओं को कब मिलेगी आजादी -

शिक्षिका शोभा सिंह ने कहा कि आज भी देश में महिलाओ-बेटियों को सुनसान रास्तो, अंधेरे में जाने से अकेले में डर लगता है। क्योंकि न जाने कब किस समय दरिंदे हैवानियत का नंगा नाच खेल दे। हमारें देश में जिस दिन महिलाएं-बेटियां स्वतंत्र रूप में अकेले चलना शुरू कर देंगी उसी दिन लगेगा कि भारत ने स्वतंत्रा प्राप्त कर ली है।