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जिनके घर मे एसी कार उनके बन रहे राशन कार्ड.... गरीब जनता अपने ही हक के निवाले को हो रही परेशान
March 2, 2020 • Vikas Deep Tyagi • मेरठ

यूरेशिया संवाददाता

मेरठ ------भले ही सरकार गरीबो के लिए सस्ते गल्ले की दुकानों पर दो रूपये किलो गेंहू और तीन रपये गेंहू बिकवाकर उनका पेट भरने की कोशिश कर रही हो पर जमीनी हकीकत कुछ और ही है हिन्दू मुखिया के राशन कार्ड में मुस्लिम नाम जुड़े होने की खबर प्रकाशित होने के बाद भले ही आपूर्ति विभाग ने कुछ राशन कार्डो में से फर्जी यूनिट काट दिए लेकिन उनके साथ साथ ही कुछ पात्र लोगो के भी राशन कार्ड काट दिए या कुछ राशन कार्डो में से यूनिट काट दिए  इस बात का कार्ड धारको को  तब पता चलेगा जब वो सस्ते गल्ले की दूकान पर अंगूठा लगाने जायेंगे और राशन डीलर कहेगा की आपका एक ही या दो ही यूनिट बचे है आखिर इन सब का जिम्मेदार कौन है आखिर फर्जी यूनिट जुड़े कैसे क्योकि पूर्ति निरीक्षक के साइन के बिना राशन कार्ड में संशोधन हो कैसे गया और अगर पूर्ति निरीक्षक ने ही राशन कार्डो का यूनिट जोड़ कर  संशोधन किया है तो  राशन कार्डो में हिन्दू मुखिया होने के बावजूद मुस्लिम बच्चे क्यों नहीं दिखे क्या ये जांच का विषय नहीं बनता। कहना तो ये भी गलत नहीं होगा की कुछ राशन कार्ड तो ऐसे भी है जिनके घरो में ए -सी और कार तक है। कुछ लोग सरकारी नौकरी पर होने के बावजूद सस्ते गल्ले के राशन पर अपना अधिकार जमा रहे है। जबकि गरीब जनता अपने ही हक़ के लिए परेशांन  हो रही है।