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कार्तिक पूर्णिमा मेला बल्ले-बल्ले-  ऐतिहासिक कार्तिक पूर्णिमा तिगरी धाम मेले के लिए उ0प्र0 सरकार ने खजाने का मुंह खोला, पहला 60 लाख का भुगतान
November 7, 2019 • Vikas Deep Tyagi • मुरादाबाद मंडल


एक करोड़ चालिस लाख के बजट को 70 लाख की पेशगी
जमकर खिचड़ी खाओ, गंगा नहाओ, फूल बरसाओ जी
ए0एस0 कमालिया 
तिगरी धाम। आत्रे ऋषि की तपो भूमि, झाउवन तिगरी ध्यााम जहां कभी महाभारत युद्ध के बाद मन की शान्ति के लिए पांडव मय कृष्ण जी के आये थे और एक सप्ताह तक गंगा नहाये थे। वहां उसी सयम से कार्तिक पूर्णिमा का गंगा के दोनों तटो पर कार्तिक पूर्णिमा का मेला प्रत्येक वर्ष लगता है जिसे पहले जिला परिषद् फिष्र जिला पंचायत लगाती थी। खर्च उठाती थी, जनता की कई वर्षों की लम्बी मांग पर गत वर्ष प्रान्तीय दर्जा दे दिया गया है। अब मेले का खर्चा उ0प्र0 सरकार के सुपुर्द है। इस वर्ष मेले की आर्थिक सहायता का शुभारम्भ हो गया है। तिगरी धाम को जिला पंचायत से प्रस्तावित एक करोड़ 34 लाख के बजट में चालिस लाख धनराशि पिछली साठ लाख के साथ अवमुक्त कर दी गई है। इस खबर से मेले से मौहब्बत रखने वालों लोगों में हर्ष व्याप्त हो गया है। उम्मीद है भव्य मेला लगेगा, जमकर नये चावल की गाय के देशी घी की खिचड़ी खाने को मिलेगी और गत वर्षों की भांति भाजपा नेता मेले पर पुष्प वर्षा करने आयेंगे। लोग बल्ले-बल्ले करने नहायेंगे। वैसे तिगरी धाम कार्तिक मेले की परवी से पहले की शाम बड़ी गमगीन हो जाती है। जब लोग अपने बीच से चले जाने वालों की याद में गंगा तट पर जाकर दिये जलाकर याद करते हैं। तिगरी धाम तक पवित्र गंगा का जल प्रदूषित भी नही है जिसे बचाने की हम सब की जिम्मेदारी है।

जमकर नहाये, खिचड़ी खायें और बोले जय गंगे।


 वैसे तो कार्तिक पूर्णिमा के गंगा तट पर मेले उसके उद्गम स्थान से लेकर गंगा सागर तक लगते हैं मगर तिगरी धाम गढ़ गंगा ही ऐसा स्थान है जहां मेला गंगा के दोनों तटों पर लगता है। इसका मुकाबला बिजनौर बैराज, विदुर कुटी, बदायूं के सोरो मेले या पूठ भी मुकाबला नही करते। गढ़ में तो नक के कुए पर गंगा जी को पृथ्वी पर लाने वाले भगीरथ जी के गणों की मुक्ति की भी बात कही जाती है। मेला शदियों से लगता आया है। मगर इसे सबसे अधिक भव्य रूप अविभाजित जिला मुरादाबाद के परिषद् अध्यक्ष संभल निवासी शरीतुल्ला जी के कार्यकाल में मिली थी जो मेले में विद्युतीकरण लाये थे, न पूजा करते थे अपितु जिला प्रशासन से कराते थे। मगर अमरोहा जिला बनने पर जिला पंचायत की अध्यक्ष सकीना बेगम पत्नि महबूब बनी जिन्होंने गंगा पूजन में दुग्ध ही नही चढ़ाया अपितु कार्तिक पूर्णिमा सपरिवार गंगा स्नान कूद-कूद कर किया। इससे राष्ट्रीय एकता को बल मिला, जिसका फायदा उसका परिवार आज तक ले रहा है। पति विधायक है बेटा सात जिलों का एम0एल0सी। मेले के लिए मेहनत सभी जिला पंचायत अध्यक्ष करते हैं। इस बार सरिता चौधरी पत्नि भूपेन्द्र करेगी। इनसे पूर्व रेणू चौधरी और इन्द्रवती पत्नी चौ0 बलवीर के काम भी सराहनीय रहे हैं। नगर पालिका गजरौला को चमकाने की अनशुनागपाल की तरह सरिता जी से भी मेले को भव्य रूप देने की अपेक्षा की जाती है। आने वाली जनता का भी कर्तव्य बनता है मेले को गन्दगी का ढेर न बनने दें। कूड़ा कूड़ेदानों में डाले, गड्डो में दफन करे। पॉलीथीन के प्रयोग से बचे।