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किसान, युवा, छात्र, श्रमिक, नौकरीपेशा व्यापारी के साथ सभी वर्गों की उम्मीदों पर खरा उतरता दिखाई नहीं देता है यह बजट: प्रशांत कौशिक
February 1, 2020 • Vikas Deep Tyagi • मेरठ

यूरेशिया संवाददाता

मेरठ। लम्बा भाषण भी बाजार को प्रभावित नहीं कर पाया, इसी से पता चलता है कि अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए जिस तरह की आर्थिक नीतियों की अपेक्षा सरकार से की जा रही थी उसमें सरकार विफल हो गई है । देश के ज्वलंत विषयों बेरोजगारी और रोजगार उपलब्ध कराने की नीतियों पर कुछ करना तो दूर उस पर कुछ बोला भी नहीं गया, किसानों की आय दोगुनी करने की बात भी अब 2022 तक चली गई है, रेल व्यवस्था को बेहतर बनाने की जगह निजी तेजस रेलों की संख्या बढ़ाने की बात कर सरकार रेलवे को निजी हाथों में देने की अपनी मंशा स्पष्ट कर रही है । आम आदमी को सीधे प्रभावित करने वाले टैक्स स्लैब में भी उम्मीदों से कम ही बदलाव किया गया है । स्मार्ट सिटी की एक बार फिर लुभावनी बात की गई है लेकिन यह नहीं बताया कि कौन सी सिटी स्मार्ट बनी है ? किसान, युवा, छात्र, श्रमिक, नौकरीपेशा व्यापारी के साथ सभी वर्गों की उम्मीदों पर खरा उतरता दिखाई नहीं देता है यह बजट । सरकार को अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए बाजार में मांग बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने के साथ रोजगार देने की नीतियों को प्रमुखता देनी चाहिए क्योंकि रोजगार बढ़ेगा तो बाजार में मांग बढ़ेगी, मांग बढ़ेगी तो उत्पादन बढेगा लेकिन सरकार अभी शायद केवल अपने पुराने वादों और नारों के मकडजाल में ही अटकी प्रतीत हो रही है इसलिए लम्बे भाषण के बाद भी जनमानस में निराशा का भाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है ।

प्रशांत कौशिक,

पूर्व महामंत्री जिला कांग्रेस कमेटी मेरठ