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मेरठ मंडल में तीन हजार लोग सघन निगरानी में : डा. गुप्ता
March 28, 2020 • Vikas Deep Tyagi • मेरठ
  • नोएडा, गाजियाबाद व मेरठ जिलों में बढ़ी निगरानी

मेरठ, 28 मार्च 2020 । नोएडा व गाजियाबाद के बाद मेरठ में भी कोरोना वायरस का एक व्यक्ति पॉजिटिव पाये जाने के बाद स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की एडिशनल डायरेक्टर डा. रेनू गुप्ता के निर्देश पर पूरे मंडल में निगरानी बढ़ा दी गयी है। अब तक मेरठ मंडल में नोएडा और गाजियाबाद जिलों में ही कोरोना वायरस के पॉजिटिव मरीज थे। सबसे ज्यादा उन लोगों पर विशेष नजर रखी जा रही है। जो या तो अन्य राज्यों व विदेश से वापस लौटे है। ऐसे लोगों को विभाग ने अपने घेरे में ले लिया है।
डा. रेनू गुप्ता ने बताया मंडल में कोरोना वायरस के करीब दो दर्जन मामले पॉजिटिव मिल चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार नोएडा में 23 गाजियबाद में 5 बागपत में एक व मेरठ में एक पॉजिटिव मरीज मिल चुका है। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पूरे मंडल में सतर्कता और बढ़ा दी गयी है। उन्होंने बताया मेरठ मंडल में 3314 लोगों को निगरानी में रखा गया है, जिसमें 1787 नोएडा, 852  गाजियाबाद, मेरठ के 469 बुलंदशहर, 852 हापुड़ के 82 व बागपत के 38 लोगों को विभाग ने कड़ी निगरानी में रखा है। इन पर विशेष नजर रखी जा रही है। सभी की रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही हैं। उन्होंने बताया पूरे मंडल में स्वास्थ्य विभाग की टीमें दिन रात काम कर रही हैं। नगर निगम की ओर क्षेत्र में ब्लीचिंग पाउडर से छिडकाव किया जा रहा है।
सामाजिक दूरी ही करेगी कोरोना से बचाव
डा. गुप्ता ने कहा सामाजिक दूरी ही कोरोना से हमारा बचाव कर सकती है। इसलिए लोग अपने घरों में ही रहें। कालोनी के पार्क में जाना भी खतरनाक हो सकता है। दरअसल किसी भी सार्वजनिक स्थान पर लोगों के संपर्क में आने की आशंका बनी रहती है। कब किसके घर में कौन मेहमान, कहां से आया होगा, कहा नहीं जा सकता। इसलिए अपने पड़ोसियों से भी सामाजिक दूरी बनाकर रखें। बेशक, आपकी जानकारी के हिसाब से आपके पड़ोसी स्वस्थ्य हों और वह ऐसे किसी संवेदनशील स्थान पर भी न गए हों। जरा सी चूक न केवल आपको विपत्ति में लाकर खड़ा कर सकती है बल्कि आपकी पूरी सोसायटी को खतरे में डाल सकती है। 
उन्होंने सलाह दी है कि लोग जहां हैं, वहीं घरों के अंदर रहें। पैत्रक स्थान पर जाने की कोशिश न करें। जो लोग महानगरों से अपने गांव और कस्बों में चले गए हैं, वह भी अपने घरों में ही बंद रहें तो बेहतर है, बेशक उनके गांव और कस्बे में कोरोना संक्रमण का कोई मामला सामने न आया हो। लेकिन यह कैसे मान लिया जाए कि अनजाने में ही सही, वह कोरोना कैरियर नहीं बने हुए हैं। दरअसल, ऐसी आशंका इसलिए भी बनी रहती है क्योंकि कि महानगरों में रहने के दौरान वे किस- किसके संपर्क में आए होंगे, उन्हें खुद भी नहीं पता।