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पहली बार बन गया इतिहास, मिल गया निर्भया को इन्साफ, दादा ने 2 को फांसी दी, पोते  ने चार को
March 20, 2020 • Vikas Deep Tyagi • मेरठ

यूरेशिया संवाददाता

मेरठ -पवन तीसरी पीढ़ी के जल्लाद हैं, जिन्होंने पहली बार चार कैदियों को एकसाथ फांसी पर लटकाया है। इससे पहले  इनके दादा ने ही रंगा-बिल्ला को भी तिहाड़ जेल में ही फांसी पर चढ़ाया था, जिन्होंने गीता चोपड़ा के साथ पहले तो सामूहिक दुष्कर्म किया फिर गीता और उसके भाई को मार डाला था। 
: निर्भया के चारों दोषियों विनय कुमार शर्मा , पवन कुमार गुप्ता, मुकेश सिंह  और अक्षय कुमार सिंह  को शुक्रवार सुबह 5:30 बजे फांसी दे दी गई।
उत्तर भारत के इतिहास में यह पहला मौका है, जब एक साथ चार कैदियों को तिहाड़ जेल में फांसी दी गई। इससे पहले महाराष्ट्र की पुणे स्थित जेल में जोशी-अभयंकर मामले में 25 अक्टूबर, 1983 को चार कैदियों को देश में एक साथ पहली बार फांसी दी गई थी। यह मामला भी काफी चर्चित हुआ था, लेकिन उस समय मीडिया की सुर्खियों में इतना नहीं रहा, जितना कि दिल्ली का निर्भया केस। सुबह तिहाड़ जेल में चारों दोषियों को दी गई फांसी ने एक इतिहास और भी रचा है। दरअसल, इसी जेल में इससे पहले जल्लाद पवन के दादा ने इंदिरा गांधी के हत्यारों सतवंत सिंह और केहर सिंह को तिहाड़ जेल में ही फांसी पर लटकाया था। माँ बोली मिल गया इन्साफ