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पूर्व मुख्यमंत्री डॉ साहिब सिंह की 13 वीं पुण्य तिथि पर दी श्रद्धांजलि
June 30, 2020 • विकास दीप त्यागी • उत्तर प्रदेश
  • जमीन से जुड़े हर वर्ग के नेता थे साहिब सिंह: राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य

यूरेशिया संवाददाता 

गाजियाबाद,मंगलवार को केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री,आर्य नेता,किसान नेता डॉ साहिब सिंह वर्मा की 13वीं पुण्य तिथि पर ऑनलाइन श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।उल्लेखनीय है कि उनका दिनांक 30 जून 2007  को राजस्थान में सड़क दुर्घटना में निधन हो गया था।
केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि साहिब सिंह किसानों व मजदूरों के हितैषी नेता थे और जमीन से जुड़े हर व्यक्ति को पहचानते और सम्मान देते थे, आज ऐसे नेताओं का अभाव दिखाई देता है।हंसमुख व मिलनसार सर्व सुलभ व्यक्ति थे उनके बाद आम आदमी के बीच का कोई नेता नहीं मिला जो जनता के सुख दुख का साथी हो। उन्होंने कहा कि वह महर्षि दयानंद जी के कट्टर अनुयायी थे और यज्ञ के प्रति उनके दिल में अपार श्रद्धा थी।आज यदि बीजेपी को दिल्ली में राजनीतिक वनवास समाप्त कर वापिसी करनी है तो किसी जमीनी संघर्ष शील नेता को आगे लाना होगा जिसका सर्वदा अभाव दिखाई देता है तभी तो अमित शाह जी को दिल्ली देखनी पड़ रही है।

कार्यक्रम के अध्यक्ष आर्य नेता जगदीश मलिक ने कहा कि बीजेपी दिल्ली देहात,हरियाणा और उत्तर प्रदेश में घर घर पहुंचाने का श्रेय साहिब सिंह को जाता है जिन्होंने 36 बिरादरीओं तक पहुंच बनायी वह सबके सुख दुख के साथी थे ऐसा नेता सदियों बाद मिला करता है।

प्रान्तीय महामंत्री प्रवीण आर्य ने कहा कि "हजारों साल तक नर्गिस अपनी बेनूरी पर रोती है,बड़ी मुश्किल से पैदा होता है चमन में दीदावर पैदा" कर्मठ,ईमानदार, सरल स्वभाव के व्यक्तित्व को नमन किया।

पूर्व मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ओम सपड़ा ने कहा कि उनका सरल व्यक्तित्व पहली बार मे ही सबको अपना बना लेता था।दिल्ली के पूर्व चीफ टॉवन प्लानर वीरेश बुग्गा ने उनके जीवन को प्रेरणा प्रद बताया।

श्रीमती प्रवीन आर्या,संगीता आर्या,किरण सहगल,प्रतिभा सपड़ा,राजश्री यादव,वीना वोहरा, मधु खेड़ा ने मधुर गीतों द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की। 

परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री महेन्द्र भाई,धर्मपाल आर्य,कर्नल विपिन खेड़ा,सौरभ गुप्ता,वीरेन्द्र आहूजा, सुरेन्द्र शास्त्री,प्रकाशवीर शास्त्री, प्रेम सचदेवा आदि ने उन्हें महान कर्मयोगी बताया और उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।