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राष्ट्रीय बालिका दिवस:  बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ सिर्फ अभियान नहीं इसे चरित्र में उतारें : सीएमओ
January 27, 2020 • Vikas Deep Tyagi • मेरठ

यूरेशिया संवाददाता

 मेरठ। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ सिर्फ अभियान नहीं, बल्कि इसे अपने चरित्र में उतारना होगा। समाज को इसमें बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेना होगा। सिर्फ रैली निकालने से काम नहीं चलेगा। शहर के अलावा गांव स्तर पर भी लोगों को जागरूक करने का कार्य धरातल पर करने की जरूरत है। यह बात राजकीय बालिका इंटर कालेज में राष्ट्रीय बालिका दिवस के मौके पर आयोजित बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यशाला में शिक्षकों को सम्बोधित करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डा. राजकुमार ने कहीं।
उन्होंने कहा इस दिन को मनाने का मकसद लिंगानुपात को सुधारने की दिशा में प्रयास करना है। इसके साथ ही पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम 1994 (पीसीपीएनडीटी) के बारे में लोगों में जागरूकता पैदा करना है। हर वर्ष 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। सीएमओ ने कहा बेटी शिक्षित होगी तो समाज भी शिक्षित होगा। आज के क्षेत्र में बेटियां किसी से कम नहीं हैं। खेल, शिक्षा, चिकित्सा, विज्ञान व अन्य क्षेत्रों में बेटियों का दबदबा है। ऐसे में हमें बेटा-बेटी में कोई फर्क नहीं करना चाहिए।
एसीएमओ डा. पूजा शर्मा ने कहा देश में बेटियों की संख्या लगातार घट रही है, जो कि चिंता का विषय है। उन्होंने बेटियों को बेटों के समान शिक्षित करने और केंद्र व राज्य सरकार द्वारा बेटियों के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा भ्रूण लिंग जांच करने और कराने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग मुखबिर योजना चला रहा है। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. प्रवीण गौतम ने कहा लिंगानुपात की बात करें तो देश में केरल व पांडेचरी दो राज्य ऐसे हैं जहां पर लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या अधिक है। देश में 1000 लड़कों पर 931 लड़की हैं। यूपी में 1000 पर 912 लड़की हैं । मेरठ में 1000 लड़कों पर 898 लड़की हैं। दस साल से नीचे के बच्चों में यह आंकड़ा काफी चौंकाने वाला है। 1000 लड़कों पर 858 लड़कियों का है। उन्होंने कार्यशाला में आये शिक्षकों व अधिकारियों से अपील की कि लड़कियों को उतनी ही अहमियत दी जानी चाहिये, जितनी लड़कों को।
कार्यक्रम में जिले के 34 प्राथमिक विद्यालय, हाई स्कूल व इंटर कालेज के प्रधानाचार्यों व शिक्षकों ने भाग लिया। इसमें आशा, एएनएम, आंगनबाड़ी भी शरीक हुईं।  शनिवार को सीएमओ कार्यायल से जागरूकता रैली निकाली जाएगी।
क्या है पीसीपीएनडीटी एक्ट
पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियमए 1994 भारत में कन्या भ्रूण हत्या और गिरते लिंगानुपात को रोकने के लिए एक संघीय कानून है। इस अधिनियम से प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। ऐसे में अल्ट्रासाउंड या अल्ट्रासोनोग्राफी कराने वाले जोड़े या करने वाले डाक्टरए लैब कर्मी को तीन से पांच साल सजा और 10 से 50 हजार जुर्माने की सजा का प्रावधान है।
मुखबिर योजना
प्रदेश सरकार ने कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए मुखबिर योजना भी चलायी है। योजना के तहत कन्या भ्रूण हत्या की जानकारी देने वाले को सरकार की ओर से दो लाख रूपये का इनाम दिया जाता है। मुखबिर की पहचान गुप्त रखी जाती है।