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शीथ व्लाइट रोग के चलते पीली पडी धान की फसल 
September 7, 2020 • विकास दीप त्यागी • सहारनपुर मण्डल

बीमारी के चलते सूख रहे धान 

  • रोग के चलते खेतों में पानी होने के बाद भी धान की फसल सूखने से किसान चिंतित

अरविन्द सिसौदिया/युरेशिया संवाददाता

नानौता (सहारनपुर) , इस बार जिलेभर में धान की होने वाली बंपर पैदावार पर पानी फिरता नजर आ रहा है। क्योंकि धान की फसल में शीथ व्लाइट और वेक्टीरियल लीफ व्लाइट रोग का प्रकोप शुरू हो गया है। वहीं खेतों में पानी भरा होने के बावजूद अचानक सूख रहे पौधांे के चलते किसानों में हडकंप की स्थिती है। ऐसे में किसान बाजार में कई प्रकार की दवाइयां मिलाकर उसका स्प्रे करने में लगे है। वहीं इस संबध में कृषि विशेषज्ञों ने रोग से लडने के बारे में अवगत कराया है।
इस वर्ष मानसून की कमी और पानी की कमी के चलते किसानों ने धान की रोपाई की है। इसके बावजूद जिलेभर में धान की फसल अच्छी खडी हुई थी लेकिन अचानक से मौसम में गर्माहट के चलते फसल में रोग लगना शुरू हो गए है। वर्तमान में धान के पौधों में शीथ व्लाइट और वेक्टीरियल लीफ व्लाइट रोग का प्रकोप देखने को मिल रहा हे। इसमें धान के पौधे अचानक से सूखने लगते है। जिसके चलते किसानों की चिंताएं बढी है। कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इस रोग से करीब 10-15 प्रतिशत तक उत्पादन कम हो सकता है। यदि रोग का समयानुसार नियंत्रण न किया गया तो उत्पादन पर और अधिक भी असर पड सकता है। 
क्या करें इन रोगों से पीडित किसान -
सहारनपुर कृषि विभाग के विशेषज्ञ डा. आईके कुशवाहा ने बताया कि धान की फसल में जब सूखन जैसा रोग आ जाएं तो धान से तुंरत पानी निकालकर उसे सुखाना चाहिए। एक बार धान के खेत को खुश्क कर देना चाहिए। इस दौरान उसके पौधे से बदबू आती है। इसके लिए हेक्टाक्लोनाजोल व व्लेटामाइसीन दवाई का स्प्रे करना चाहिए। इसके अलावा धान के खेत में छल्ले के आकार में काफी संख्या में हॉपर कीट पौधे की जड में बैठ जाता है। यदि समय से इसका उपचार न हो तो यह पूरे खेत में फैल जाता है। इसके लिए किसान तुंरत ही डीनोथेपरॉन नामक दवाई का स्प्रे धान में करने से इस बीमारी से बचाव होता है।