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शिक्षा मंत्रालय का काम मानव निर्माण शिक्षा की समुचित व्यवस्था प्रदान करना: - शेखर त्यागी तलहैटा
August 10, 2020 • विकास दीप त्यागी • मेरठ

रोमन त्यागी

मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदल कर पुनः शिक्षा मंत्रालय करने पर समस्त देशवासिओ को हार्दिक शुभकामनाये! भारत सरकार ने हाल ही में मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदल कर पुनः शिक्षा मंत्रालय कर एक सातत्य सनातनता के बोध का परिचय दिया है। 1985 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने पश्चिम का अनुकरण कर शिक्षा मन्त्रालय का नाम बदल कर मानव संसाधन विकास मंत्रालय करके आधुनिकता का परिचय देने का प्रयत्न किया था । पर यह एक बड़ी भूल थी। इस भूल मार्जन के लिये देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने अपनी धरती से, अपनी ज्ञानमयी परम्परा से, शिक्षा की सर्वोच्चता से जुड़ने का तथा देश की जनता को जोड़ने का एक अभिनंदनीय कार्य किया है।

शेखर त्यागी तलहैटा

शिक्षा मंत्रालय का काम मानव निर्माण शिक्षा की समुचित व्यवस्था प्रदान करना है। बालक के अंदर प्रसुप्त चेतना, उसकी अंतर्निहित योग्यता को इस तरह से जगाना है, बाहर निकालना है जैसे एक कुशल शिल्पकार पत्थर से मूर्ति का निर्माण करता है । प्रत्येक बालक में कुछ न कुछ विलक्षण प्रतिभा है, उस प्रतिभा की खोज कर उसे उड़ने के लिए पंख प्रदान करना अच्छे शिक्षकों का काम है । इसलिए केन्द्रीय मंत्रालय तथा राज्यों के शिक्षा विभागों का सबसे पहले सही प्रशिक्षण की व्यवस्था कर उत्तम शिक्षकों का निर्माण करना सबसे अहम कर्त्तव्य है । तभी तो मानव की अंतर्निहित पूर्णता बाहर छलकेगी। 

 राष्ट्र की जरूरतों को ध्यान में रखकर अच्छे नागरिकों का निर्माण करना भी शिक्षा मंत्रालय की ज़िम्मेदारी है । हमें यह स्वीकार करना होगा कि बालक के रूप में यह मनुष्य देवत्व का प्रतिनिधि है , सृष्टि की अमूल्य व अलभ्य कृति है । उसकी सामर्थ्यतथा प्रतिभा पर कोई सीमा नहीं लगायी जा सकती । वह केवल एक संसाधन नहीं, संसाधनों का निर्माण करने वाला तथा उनका समाज व राष्ट्र के हित में समुचित उपयोग करने वाला समाज व राष्ट्र का ही प्रतिनिधि है। उसके अपने व्यक्तिगत जीवन को भौतिक व आध्यात्मिक ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तथा सर्वहितकारी कर्त्तव्यों के लिए तैयार करना व करवाना शिक्षा मंत्रालय का एक देवतुल्य कार्य है। 

 भारतीय संस्कृति में नाम की बड़ी क़ीमत है। इसीलिये नामकरण संस्कार का महत्व है। मानव को केवल एक संसाधन ही मान लेना मानवता की एक अवहेलना भी है और उसकी अवमानना भी। मुझे विश्वास है कि अब शिक्षा मन्त्रालय एक ऐसी सशक्त सर्वांगीण विकास की व्यवस्था को जन्म देगा जिसकी जड़ें भारतीय संस्कृति में होगी। वह शिक्षा भूतकाल की दास न बनकर, सनातन सत्यों के प्रकाश में, विश्वजनींन मूल्यों की छाया में, मनुष्य को समष्टि से और सम्पूर्ण सृष्टि से जोडता हुआ विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी रूपी अविद्या को अपनाती हुई भारत देश को एक परम वैभव पर पहुँचाने में सफल होगी।