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शिक्षक नेता ने अवैध वसूली के खिलाफ छेड़ी जंग: मुख्यमंत्री के नाम दिया ज्ञापन
August 10, 2020 • विकास दीप त्यागी • मेरठ

शिक्षक नेता दीपक शर्मा।

रिहान आलम यूरेशिया संवाददाता

सरधना। शिक्षक नेता दीपक शर्मा ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देते हुए कहा कि प्राइवेट विद्यालयों पर लगभग स्पष्ट गाइडलाइन आ चुकी है कि सभी लोग अपनी मासिक  फीस जमा करेंगे और दबाव भी किसी पर नहीं बनाया जाएगा या वह अपनी सुविधा के अनुसार उस फीस को जमा कर दें और यह उचित भी है मैं इसका समर्थन भी करता हूं। लेकिन जो मेरे ज्ञापन देने का उद्देश्य है वह है कि पिछले दर्जनों सालों से शासन के निर्देशों के बाद भी सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालय वो चाहे अल्पसंख्यक हों अर्थात जहां सरकार से वेतन आता है ।जहां  शासन द्वारा यह नियत किया जा चुका है कि रजिस्टर फीस जो  कक्षा 8 तक कोई शुल्क नही  । कक्षा 9 से 12 तक सामान्य छात्रों से ₹25 माह से अधिक नहीं होगी  तथा अनुसूचित जाति के लिए यह लगभग ₹3 प्रति माह होगी जुलाई में जरूर यह थोड़ी सी बढ़ी हुई होती है जैसे सामान्य जाति के छात्रों के लिए लगभग ₹50 अनुसूचित के लिए लगभग ₹25 ऐसी स्थिति में  पूरे वर्ष में 300 से ₹400 से अधिक फीस किसी भी सूरत में लेने का प्रावधान नहीं है । अभी कुछ सरकार से वेतन प्राप्त करने वाले विद्यालय उनके प्रबंधक उनके प्रधानाचार्य शिक्षक छात्रों को अधिक फीस लाने के लिए मजबूर कर रहे हैं और संदेश दे रहे हैं बाकायदा फोन कर रहे हैं जिसके प्रमाण आप चाहेंगे तो आपको उपलब्ध करा देंगे ।यह अनुचित है ।उनसे 1500 से 2500 रुपये के अवैध धन की मांग की जा रही है ।प्रवेश ना देने की धमकी दी जा रही है और नाम काटने की बात कहकर डराया जा रहा है ।प्राइवेट विद्यालय अपने स्तर से व्यवस्था करते हैं उनसे भी आपके द्वारा और हम सब के द्वारा भी यह अनुरोध किया जा चुका है कि जितना भी अनुतोष वह दे सकते हैं वह दे और इसके लिए संभवत अधिकांश विद्यालय तैयार भी  है उन्होंने मुख्यमंत्री को लिखा कि सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालय या  जहां सरकार से वेतन आता है उन विद्यालयों की जांच कराई जाए और उन्हें इस बात के लिए बाध्य किया जाए कि वह अधिक फीस ना लें कई स्थानों पर पीटीए के नाम पर शुल्क लिया जा रहा है और इसका कोई हिसाब नहीं है । कोविद 19 के बाद के समय में यह बड़ी दर्दनाक स्थिति है  क्या बच्चे  स्कूल छोड़ कर के अपने घर बैठ जाएं बेटियां शिक्षा प्राप्त कर ना कर  सकें