ALL मेरठ सहारनपुर मण्डल मुजफ्फरनगर बागपत/ बड़ौत उत्तर प्रदेश मुरादाबाद मंडल राष्ट्रीय राजनीतिक विविध करियर
विनाश से बचाने के लिये प्रकृति संरक्षण जरूरी : प्रथम अग्रवाल
July 28, 2020 • विकास दीप त्यागी • मेरठ
  • जल, जंगल और ज़मीन के बिना प्रकृति अधूरी है

यूरेशिया संवाददाता

 विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस प्रत्येक वर्ष 28 जुलाई को मनाया जाता है। सामाजिक कार्यो में रुचि रखने एवम पर्यावरण प्रेमी प्रथम अग्रवाल ने बताया कि वर्तमान परिपेक्ष्य में कई प्रजाति के जीव जंतु एवं वनस्पति विलुप्त हो रहे हैं। विलुप्त होते जीव जंतु और वनस्पति की रक्षा का विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस पर संकल्प लेना ही इसका उद्देश्य है। जल, जंगल और जमीन, इन तीन तत्वों के बिना प्रकृति अधूरी है। विश्व में सबसे समृद्ध देश वही हुए हैं, जहाँ यह तीनों तत्व प्रचुर मात्रा में हों।भारत देश जंगल, वन्य जीवों के लिए प्रसिद्ध है। सम्पूर्ण विश्व में बड़े ही विचित्र तथा आकर्षक वन्य जीव पाए जाते हैं।हमारे देश में भी वन्य जीवों की विभिन्न और विचित्र प्रजातियाँ पाई जाती हैं। प्रथम अग्रवाल ने बताया कि पर्यावरण शब्द परि+आवरण के संयोग से बना है। ‘परि’ का आशय चारों ओर तथा ‘आवरण’ का आशय का परिवेश है। दूसरे शब्दों में कहें तो पर्यावरण अर्थात वनस्पतियों ,प्राणियों,और मानव जाति सहित सभी सजीवों और उनके साथ संबंधित भौतिक परिसर को पर्यावरण कहतें हैं वास्तव में पर्यावरण में वायु ,जल ,भूमि ,पेड़-पौधे , जीव-जन्तु ,मानव और उसकी विविध गतिविधियों के परिणाम आदि सभी का समावेश होता हैं। पर्यावरण प्रदूषण के कुछ दूरगामी दुष्प्रभाव हैं , जो अतीव घातक हैं , जैसे आणविक विस्फोटों से रेडियोधर्मिता का आनुवांशिक प्रभाव , वायुमण्डल का तापमान बढ़ना , ओजोन परत की हानि , भूक्षरण आदि ऐसे घातक दुष्प्रभाव हैं। प्रत्यक्ष दुष्प्रभाव के रूप में जल , वायु तथा परिवेश का दूषित होना एवं वनस्पतियों का विनष्ट होना , मानव का अनेक नये रोगों से आक्रान्त होना आदि देखे जा रहे हैं। बड़े कारखानों से विषैला अपशिष्ट बाहर निकलने से तथा प्लास्टिक आदि के कचरे से प्रदूषण की मात्रा उत्तरोत्तर बढ़ रही है। प्रथम अग्रवाल ने बताया की पर्यावरण संरक्षण के प्रयास जैसे जंगलों को न काटे,कार्बन जैसी नशीली गैसों का उत्पादन बंद करे,उपयोग किए गए पानी का चक्रीकरण करें,ज़मीन के पानी को फिर से स्तर पर लाने के लिए वर्षा के पानी को सहेजने की व्यवस्था करें, ध्वनि प्रदूषण को सीमित करें,प्लास्टिक के लिफाफे छोड़ें और रद्दी काग़ज़ के लिफाफे या कपड़े के थैले इस्तेमाल करें,जिस कमरे मे कोई ना हो उस कमरे का पंखा और लाईट बंद कर दें.पानी को फालतू ना बहने दें,आज के इंटरनेट के युग में, हम अपने सारे बिलों का भुगतान आनलाईन करें तो इससे ना सिर्फ हमारा समय बचेगा बल्कि काग़ज़ के साथ साथ पैट्रोल डीजल भी बचेगा,ज्यादा पैदल चलें और अधिक साइकिल चलाएं,प्रकृति से धनात्मक संबंध रखने वाली तकनीकों का उपयोग करें,जैसे- जैविक खाद का प्रयोग, डिब्बा-बंद पदार्थो का कम इस्तेमाल,जलवायु को बेहतर बनाने की तकनीकों को बढ़ावा दें,पहाड़ खत्म करने की साजिशों का विरोध करें।