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यूपी की चर्चित शिक्षिका: न अनामिका शुक्ला, न अनामिका सिंह और ना ही प्रिया सिंह, फर्जी महिला शिक्षिका का असली नाम सुप्रिया सिंह
June 8, 2020 • Vikas Deep Tyagi • उत्तर प्रदेश

  • ;यूरेशिया संवाददाता
कासगंज यूपी में चर्चित फर्जी अनामिका शुक्ला नाम से नौकरी करती पकड़ी गई शिक्षिका न अनामिका शुक्ला, न अनामिका सिंह और ना ही प्रिया सिंह। फर्जी महिला शिक्षिका का असली नाम सुप्रिया सिंह है। पूछताछ में उसने ना केवल अपने नाम बदलकर बताए, बल्कि पता भी गलत बताया। पुलिस उसकी जानकारियों को जांच में शामिल कर रही है। पुलिस अब उसके असली नाम के पहचान पत्र को हासिल करने में जुटी है। वहीं पकड़ी गई शिक्षिका से पूछताछ करने रविवार को एसटीएफ आगरा की टीम पहुंची। दोपहर को करीब दो घंटे तक पूछताछ कर तमाम जानकारियां हासिल की। दोपहर बाद आरोपी शिक्षिका को पुलिस ने अदालत में पेश किया। जहां से कोर्ट ने उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।  

जैसे ही सुबह अखबारों में अनामिका शुक्ला नाम से नौकरी करने वाली महिला शिक्षिका की फोटो छपी और चैनलों पर उसका चेहरा दिखाई दिया। वैसे ही कायमगंज के रजपालपुर में रहने वाले उसके परिजनों को इसकी जानकारी हुई। इसके बाद परिवार के लोगों में हड़कंप मच गया। महिला शिक्षिका से परिजनों के मोबाइल नंबर पुलिस को मिले तो पुलिस ने उसके नाम पते को लेकर जांच करनी शुरू कर दी। कोतवाली प्रभारी सोरों रिपुदमन सिंह ने बताया कि, पकड़ी गई महिला शिक्षिका का नाम सुप्रिया सिंह पता चला है, वह कायमगंज के समीप गांव रजपालपुर के निवासी महीपाल सिंह की पुत्री है। पुलिस की टीम गांव में जांच करने पहुंची थी।

एसटीएफ की टीम पहुंची : 
शासन से निर्देश के बाद रविवार दोपहर को एसटीएफ टीम सोरों कोतवाली पहुंची। यहां कोतवाली में बंद फर्जी शिक्षिका सुप्रिया सिंह से एसटीएफ ने काफी देर तक जानकारियां हासिल कीं। कोतवाली प्रभारी रिपुदमन सिंह ने बताया कि एसटीएफ की पूछताछ पूरी होने के बाद सुरक्षा के बीच आरोपी शिक्षिका को कोर्ट के समक्ष पेश किया। कोर्ट ने आरोपी महिला शिक्षिका को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेश दिए। जिस पर पुलिस उसे जिला जेल ले गई।
इस संबंध में एसपी सुशील घुले ने बताया कि आरोपी शिक्षिका से पूछताछ कर ली है। सोरों पुलिस ने आरोपी शिक्षिका को न्यायालय में पेश किया था, जहां से न्यायालय के आदेश पर उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इस मामले में पुलिस की टीमें जांच के लिए गई स्थानों पर भेजी गई हैं। जांच चल रही है, पूछताछ में जिन लोगों के संपर्क फर्जी शिक्षिका के मामले में पता चले हैं उन्हें चिह्नित कर जांच की जाएगी।

अनामिका शुक्ला की धुंधली तस्वीर बनी मददगार
कासगंज बेसिक शिक्षा अधिकारी अंजली अग्रवाल के अनुसार अनामिका शुक्ला के मूल दस्तावेजों में धुंधली फोटो भी इस कॉकस की मददगार बनी। साक्षात्कार के दौरान यह फोटो देखी जाती है, लेकिन धुंधली होने पर अभ्यर्थी के आधार कार्ड और अन्य पहचानपत्र के आधार पर चयन किया जाता है। जिस तरह से बैंकों में अनामिका शुक्ला के नाम से खाता खुलवाया गया, उससे माना जा रहा है कि आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज फर्जी तैयार कराए गए हैं। कोतवाली सोरों पुलिस ने बेसिक शिक्षा अधिकारी अंजलि अग्रवाल की तहरीर पर अनामिका के खिलाफ धोखाधड़ी एवं कूटरचित अभिलेख तैयार करने के मामले में धारा 420, 467 एवं 468 में मुकदमा दर्ज किया है। वहीं रायबरेली में फर्जी शिक्षिका अनामिका शुक्ला का मामले में बीएसए आनंद प्रकाश शर्मा ने बछरांवा थाने में एफआईआर दर्ज करवाई हैं। बछरांवा कस्तूरबा गांधी विद्यालय में तैनाती के दौरान 2,58, 298 रुपए ले वेतन चुकी है।

तो खाता खुलवाने में भी दिया फर्जी दस्तावेज?
शिक्षिका बनने के बाद में प्रिया ने अनामिका शुक्ला के नाम से कासगंज में खाता खुलवाया। माना जा रहा है कि प्रिया ने बैंक खाते में भी फर्जी दस्तावेज का प्रयोग किया। हालांकि सरकारी कर्मियों के विभागीय दस्तावेज को भी प्रमाण पत्र के रूप में प्रस्तुत करने पर बैंक खाता खोल देती है, लेकिन बैंक में फोटो प्रमाण पत्र की जरूरत होती है। ऐसे में माना जा रहा है कि अनामिका ने बैंक में आधार कार्ड या अन्य कोई फर्जी दस्तावेज दिया होगा। इसकी भी पुलिस जांच करेगी।

ये है पूरा मामला
बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) में कार्यरत अनामिका शुक्ला ने एक वर्ष में वेतन के रूप में लगभग एक करोड़ रुपए कमाए। इस दौरान वह एक साथ 25 जिलों में काम करती रहीं और किसी को भनक तक नहीं लगी। विभाग ने जब शिक्षकों का डेटाबेस बनाया तो मामला सामने आया। अब इनके खिलाफ जांच का आदेश दिया गया है। अनामिका शुक्ला को प्रदेश के जिलों में 25 विभिन्न स्कूलों में नियोजित किया गया था। हर जगह से उनके खाते में सैलरी भी आ रही थी।

एक बार रिकॉर्ड अपलोड होने के बाद, यह पाया गया कि अनामिका शुक्ला, एक ही व्यक्तिगत विवरण के साथ 25 स्कूलों में सूचीबद्ध थीं। इस दौरान अनामिका शुक्ला, पूर्णकालिक शिक्षिका के रूप में 25 स्कूलों में कार्यरत थीं। वह अमेठी, अंबेडकरनगर, रायबरेली, प्रयागराज, अलीगढ़ और अन्य जिलों में एक शिक्षिका के रूप में पंजीकृत थीं। एक डिजिटल डेटाबेस के बावजूद, वह फरवरी 2020 तक 13 महीने के लिए धोखाधड़ी से विभाग से लगभग एक करोड़ रुपए का वेतन निकालने में सफल रही। इस पूरे मामले की जांच के बाद हर दिन नए नए मामले सामने आ रहे हैं।